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सहारनपुर में रियल एस्टेट महाठगी का सनसनीखेज खुलासा: गोल्डन सिटी कॉलोनी छुटमलपुर में प्लॉट के नाम पर सुनियोजित धोखाधड़ी

महिला से ₹5.70 लाख हड़पे, कॉलोनाइजरों का पूरा गिरोह शक के घेरे में—पुलिस केस दर्ज, राजस्व विभाग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

🚨 सहारनपुर में रियल एस्टेट महाठगी का सनसनीखेज खुलासा: गोल्डन सिटी कॉलोनी छुटमलपुर में प्लॉट के नाम पर सुनियोजित धोखाधड़ी, महिला से ₹5.70 लाख हड़पे, कॉलोनाइजरों का पूरा गिरोह शक के घेरे में—पुलिस केस दर्ज, राजस्व विभाग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल 🚨

सहारनपुर। जनपद सहारनपुर के कस्बा छुटमलपुर स्थित हलवाना रोड पर विकसित की जा रही तथाकथित “गोल्डन सिटी कॉलोनी” अब आम लोगों के सपनों का घर नहीं बल्कि धोखाधड़ी और ठगी का अड्डा बनती जा रही है, जहां प्लॉट दिलाने के नाम पर मेहनत की कमाई लूटे जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस सनसनीखेज मामले में कॉलोनी विकसित करने का दावा करने वाले मुसा सिदक्की, मोहम्मद फैजान, निसार, मोहम्मद नाजिम, आज़म और नावेद नामक छह लोगों पर एक महिला मुनीसा से कुल ₹5 लाख 70 हजार रुपये ठगने का आरोप है। पीड़िता के अनुसार, इन लोगों ने गोल्डन सिटी कॉलोनी में प्लॉट बेचने का झांसा देकर पहले विश्वास जीता, आकर्षक बातें कीं, कॉलोनी का नक्शा दिखाया और बेहतर लोकेशन का लालच देकर चरणबद्ध तरीके से उससे मोटी रकम वसूल ली, लेकिन जब बैनामा कराने की बारी आई तो आरोपी टालमटोल करने लगे। पीड़िता द्वारा लगातार शिकायत किए जाने और ठोस साक्ष्य सामने आने के बाद आखिरकार पुलिस ने दिनांक 03 जुलाई 2025 को मुकदमा अपराध संख्या 0138 दर्ज किया, जिसके बाद यह मामला पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया। स्थानीय सूत्रों और अन्य पीड़ितों का कहना है कि यह केवल एक मामला नहीं है, बल्कि इसी कॉलोनी के नाम पर कई और लोगों से भी इसी तरह की ठगी की जा चुकी है, जिनमें कुछ लोग लोकल बदनामी और कानूनी डर के चलते अब तक सामने नहीं आए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी कॉलोनाइजर एक सुनियोजित तरीके से पहले जमीन दिखाते हैं, प्लॉट की सीमाएं बताते हैं, सड़क, बिजली, पानी और भविष्य के विकास के सपने दिखाकर खरीदार को झांसे में लेते हैं, फिर बयाना के नाम पर ₹1 लाख से ₹3 लाख तक की रकम तुरंत ले लेते हैं और शेष रकम रजिस्ट्री के समय देने की बात कहकर मामला आगे बढ़ाते हैं, लेकिन जैसे ही खरीदार बैनामा कराने की बात करता है, तो उसे उलझाने के लिए नए-नए बहाने गढ़े जाते हैं। कभी कहा जाता है कि जमीन अभी अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम दर्ज है, इसलिए स्थानांतरण की अनुमति नहीं मिली, तो कभी राजस्व अभिलेखों में सुधार, नक्शा पास होने या कॉलोनी की स्वीकृति का हवाला देकर समय खींचा जाता है। इसी बीच न तो खरीदार को प्लॉट मिलता है और न ही उसकी दी गई रकम वापस की जाती है, जिससे पीड़ित मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और सामाजिक अपमान का शिकार हो जाता है। पीड़िता मुनीसा का कहना है कि उसने अपनी जमा-पूंजी और उधार लेकर यह रकम दी थी, लेकिन अब उसे न तो प्लॉट मिला और न ही पैसे लौटाए गए, उल्टा आरोपी उसे धमकाने और मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। इस पूरे प्रकरण ने पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना किसी वैधानिक अनुमति के कॉलोनी काटी जा रही है और इसके बावजूद संबंधित विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस भूमि पर गोल्डन सिटी कॉलोनी विकसित की जा रही है, वह भूमि कृषि है या गैर-कृषि, तथा क्या उस भूमि को कॉलोनी में तब्दील करने के लिए आवश्यक सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गई हैं या नहीं। जानकारों का कहना है कि अगर भूमि अनुसूचित जाति के व्यक्ति के नाम दर्ज है, तो उसके हस्तांतरण और बिक्री के लिए विशेष अनुमति जरूरी होती है, और यदि बिना अनुमति के प्लॉट बेचे जा रहे हैं, तो यह गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में राजस्व विभाग, नगर पंचायत और संबंधित विकास प्राधिकरण की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस कॉलोनी का नक्शा पास है या नहीं, लेआउट स्वीकृत है या नहीं, और बुनियादी सुविधाओं की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है। पीड़ितों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने सख्ती दिखाई होती, तो आज कई लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने से बच सकते थे। वर्तमान में स्थिति यह है कि ठगी का शिकार हुए कई पीड़ित और पीड़िताएं न्याय की आस में थाने, पुलिस अधिकारियों और कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक ठोस राहत नहीं मिल पाई है। इस मामले ने सहारनपुर में अवैध कॉलोनियों और फर्जी रियल एस्टेट कारोबार की भयावह तस्वीर सामने रख दी है, जहां बिना रजिस्ट्रेशन, बिना नक्शा पास और बिना सरकारी अनुमति के कॉलोनियां काटकर आम जनता को ठगा जा रहा है। पीड़ितों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि न सिर्फ आरोपित कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, बल्कि गोल्डन सिटी कॉलोनी की पूरी भूमि की राजस्व स्तर पर उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं नियमों को ताक पर रखकर अवैध कॉलोनी विकसित कर बड़े पैमाने पर ठगी तो नहीं की जा रही। यदि प्रशासन ने समय रहते इस मामले में कड़ा कदम नहीं उठाया, तो भविष्य में यह घोटाला और भी बड़ा रूप ले सकता है, और निर्दोष लोग इसी तरह ठगे जाते रहेंगे। यह मामला अब सिर्फ एक महिला के साथ हुई धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि सहारनपुर में रियल एस्टेट माफिया, प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की कमजोरी का आईना बन चुका है।


 

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